आज की सुबह लग रही कितनी प्यारी है सुनहरी धूप बिखरी क्यारी क्यारी है, दिसंबर की ठंड भी सूरज की किरणों से हारी है, चिड़ियों की बोली भी कह रही कहानी है इस सर्दी में कितना अच्छा लग रहा ये गर्म पानी है, वाहनों का शोर भी लग रहा जैसे कोई संगीत है , न जाने दिल क्यों आज इतना खुश है धड़कने गा रही जैसे कोई गीत है।
Pushp vaatika
पुष्प वाटिका हमारे एहसासों की दुनिया... हमारी स्वरचित कहानियां, कविताएं, शायरी, धार्मिक और ऐतिहासिक कहानियां....