ऑफिस बन्द हो गया था सब अपने - अपने घर जाने की जल्दी में आपस में बातें करते हुए बाहर निकल रहे थे, इस भीड़ में शांत सी दिखती शिया बाहर निकली, उसके चेहरे को देख कर साफ़ पता चल रहा था कि वो अपने मन में दुखों का कितना बड़ा समंदर समेटे हुए थी । अभी वो बाहर निकली ही थी कि, किसी की आवाज आई शिया ..वो चौंक कर पीछे मुड़ी सामने राघव खड़ा था , राघव और शिया कॉलेज में साथ पढ़ते थे, पांच दोस्तों का ग्रुप था उनका, कॉलेज ख़तम होने के बाद आज उन लोगों की मुलाकात हुई थी। थोड़ी सी बातें करने के बाद राघव ने कहा चलो घर चलते है में तुम्हे घर छोंड़ देता हूं। राघव भी उस तरफ ही जा रहा था। रास्ते में राघव ने कई बार शिया से पूछा कि सब ठीक तो है ना क्योंकि शिया को देखकर उसे लग रहा कि वो बहुत परेशान है , जो लड़की हर समय बोलती रहती थी कितना खुशमिजाज थी वो आज बिल्कुल चुप थी, लेकिन हर बार शिया ने सब ठीक है कहकर उस...
पुष्प वाटिका हमारे एहसासों की दुनिया... हमारी स्वरचित कहानियां, कविताएं, शायरी, धार्मिक और ऐतिहासिक कहानियां....